वो जगह जहां महिलाओं को मछली से रिझाते हैं पुरुष

सेक्स, यानी शारीरिक संबंध बनाना- दुनिया का सबसे प्राचीन और सार्वभौमिक चलन है. लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों में सेक्स करने के तरीकों में काफ़ी विविधता है.
बीबीसी के एक कार्यक्रम 'क्रॉसिंग कॉन्टिनेंट' ने इस पर शोध किया और पता लगाया कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संबंध बनाने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं.
पढ़िए दुनिया के 9 सबसे रोचक तथ्य.
पारंपरिक रूप से हवाई के मूलनिवासी अपने निजी अंगों की पूजा करते रहे हैं.
ये लोग अपने निजी अंगों के 'प्यारे-प्यारे' नाम रखते आए हैं. लेकिन ये रस्म सिर्फ़ नाम रखने तक सीमित नहीं है.
शाही परिवारों से लेकर आम लोगों तक, सभी अपने निजी अंगों के बारे में गीत भी लिखते हैं. इन गीतों में निजी अंगों के बारे में विस्तार से बताया गया होता है.
डॉक्टर मिल्टन डायमंड उन हवाई मूलनिवासियों के विशेषज्ञ हैं जिनसे बाहरी दुनिया का संपर्क नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि लिलि यूकूलानि नाम की रानी ने अपने निजी अंग का नाम 'फ़्रिस्की' रखा था.
जापान में शिशु जन्म दर गिर रही है. सिर्फ़ यही नहीं, जापान में कंडोम का इस्तेमाल भी तेज़ी से कम हुआ है.
यहाँ गर्भ निरोधक गोलियाँ, गर्भपात और यौन रोग की शिक़ायतों में भी गिरावट दर्ज की जा रही है.
जापान के परिवार नियोजन एसोसिएशन के प्रमुख कूनियो कीटामूरा कहते हैं कि इसका सिर्फ़ एक ही कारण है कि जापानी लोग कम सेक्स कर रहे हैं.
एक ताज़ा शोध में बताया गया है कि यहां सेक्स के बिना वैवाहिक जीवन बिता रहे जोड़ों की तादाद रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी है.
जापान के एक तिहाई पुरुषों का कहना है कि वो इतने थके हुए होते हैं कि सेक्स नहीं कर पाते. वहीं जापान की एक चौथाई महिलाओं का कहना है कि उन्हें सेक्स परेशानी और दर्द भरा लगता है.
18 से 34 साल के बीच के लोगों के बीच किए गए एक और शोध में बताया गया है कि बीते एक दशक में यहाँ वर्जिनिटी बहुत ज़्यादा बढ़ी है.
शोध में शामिल 45 फ़ीसदी जापानियों का कहना था कि उन्होंने कभी सेक्स किया ही नहीं है.
दक्षिण कोरिया में हर महिला औसतन 1.05 बच्चे पैदा करती है.
लेकिन देश की जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए प्रति महिला 2.10 बच्चों की जन्म दर बरक़रार रखना ज़रूरी है, जो कि मौजूदा दर से दोगुना है.
दक्षिण कोरिया की सरकार महिलाओं को बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित कर रही है. इसके लिए सरकार ने बीते एक दशक में दसियों अरब डॉलर ख़र्च किए हैं. लेकिन जन्म दर में गिरावट जारी है.
माना जा रहा है कि इसकी वजह दक्षिण कोरिया में रिहाइशी इलाक़ों की बेतहाशा बढ़ती क़ीमतें और बच्चों पर होने वाला ख़र्च भी हो सकता है.
इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि दक्षिण कोरिया में लोगों को बहुत ज़्यादा काम करना पड़ता है.
बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी अभी भी औरतों पर ही है. बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को दोगुना काम करना पड़ता है.
शायद यही वजह है कि महिलाओं ने अब बच्चों को ना कहना शुरू कर दिया है क्योंकि बच्चे पैदा करने का मतलब हमेशा के लिए अपने करियर को त्याग देना भी होता है.
रूस के एक इलाक़े में जनसंख्या बढ़ाने का पुराना तरीका अपनाया जा रहा है. उल्यानोवस्क प्रांत के गवर्नर ने 12 सितंबर को आधिकारिक तौर पर गर्भाधारण दिवस घोषित कर दिया है.
इस दिन लोगों को छुट्टी दी जाती है ताकि वो घर पर रह कर सेक्स कर सकें. जन्म दर बढ़ाने के लिए ये सरकार की एक योजना का हिस्सा है.
जो दंपति 12 सितंबर से नौ महीने बाद बच्चा पैदा कर पाते हैं, उन्हें कैमरा, फ़्रिज और वॉशिंगमशीन जैसे ईनाम दिए जाते हैं.

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